जिन्दगी गुजर जाती है एक मकान बनाने में। और कुदरत उफ़ तक नहीं करती बस्तियाँ गिराने में। ना उजाड़ ए - खुदा किसी के आशियाने को,

30-04-2015 0 Answers
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